‘Happy Birthday Iskander Mirza’: क्यों नहीं दफनाया गया पाकिस्तान में इनका शरीर!
शख्सियत

‘Happy Birthday Iskander Mirza’: क्यों नहीं दफनाया गया पाकिस्तान में इनका शरीर!

Iskander Mirza पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति और अंतिम गवर्नर-जनरल थे। इस शख्स ने पूरे पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ा कर रख दी थी। जिसकी वजह से पूरा पाकिस्तान इनके ख़िलाफ़ हो गया था। इनको इनके पद से भी निलंबित भी कर दिया गया था। और उनके पार्थिव शरीर को पाकिस्तान में दफ़नाने से मना कर दिया था। जिसके साथ उनके परिवार वालों को भी उनके ज़नाज़े में शामिल तक होने की इजाजद भी नहीं दी गयी थी।

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Iskander Mirza का जीवन

इस्कंदर मिर्ज़ा का जन्म 13 नवंबर 1899 को मुर्शिदाबाद में हुआ था। एलफिंस्टन कॉलेज, बम्बई में उन्होंने शिक्षा पाई। कॉलेज जीवन में ही रॉयल मिलिट्री कॉलेज, सैंडहरसट में उन्हें दाखिला मिल गया। वहाँ सफल होकर 1919 में वापस हिंदुस्तान आए। 1924 में वज़ीरिस्तान की लड़ाई में हिस्सा लिया।

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पाकिस्तान में मार्शल लॉ किया लागू

पाकिस्तान की स्थापना के बाद वे पाकिस्तान सरकार के रक्षा मंत्रालय के पूर्व सचिव नामित हुए। वे मई 1954 में पूर्वी पाकिस्तान के राज्यपाल बनाए गए। फिर गृह मंत्री बने। 5 मार्च, 1956 को इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान के राष्ट्रपति चुने गए. साल 1958 ई को पाकिस्तान में राजनीतिक संकट के कारण देश में मार्शल लॉ लागू किया। इस मार्शल लॉ के मुख्य प्रशासक अयूब खान को बना दिया गया था।

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किया राष्ट्रपति पद के निष्कासित

मार्शल लॉ के बाद पाकिस्तान के हालात बद से बत्तर होते चले गए। जिसकी वजह से पूरा पाकिस्तान इस्कंदर मिर्ज़ा की ख़िलाफ़ हो गया। जिसके बाद 27 अक्टूबर को मार्शल ला के मुख्य प्रशासक, फील्ड मार्शल अयूब खान ने उन्हें बर्खास्त कर दिया। और वह देश छोड़ कर अपनी पत्नी के साथ लंदन चले गए।

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सफर का अंत

पाकिस्तान से निर्वासन के बाद उन्होंने अपनी शेष जीवन लंदन में बिताए उन्हें 3000 पाउंड पेंशन मिलती थी। जिसमें उनका गुजर बसर संभव नहीं था। साथ ही इनकी तबियत भी ख़राब रहने लगी थी। जिसके बाद इन्होने अपनी पत्नी से बोला कि “हम बीमारी के इलाज का खर्च वहन नहीं कर सकते इसलिए मुझे मरने दो”। जिसके बाद 3 नवंबर, 1969 की दिल की बीमारी की वजह से इनका निधन हो गया। निधन के बाद इनके शरीर को पाकिस्तान में दफ़नाने से इंकार कर दिया गया था। जिसके बाद इनका अंतिम संस्कार तेहरान में किया गया। लेकिन इनके अंतिम संस्कार में उनके परिवार के किसी भी सदस्य को शामिल होने की अनुमति नहीं थी।

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12 November, 2019

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