‘Happy Birthday Gogineni Ranga Nayukulu’: माने जाते थे भारतीय किसान आंदोलन के जनक!
शख्सियत

‘Happy Birthday Gogineni Ranga Nayukulu’: माने जाते थे भारतीय किसान आंदोलन के जनक!

गोगिनेनी रंगा नायुकुलु, जिन्हें एन जी रंगा के नाम से भी जाना जाता था। ये भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, शास्त्रीय उदारवादी, सांसद और किसान नेता थे। साथ ही ये स्वातंत्र पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे हैं।

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N. G. Ranga का प्रारंभिक जीवन

रंगा जी का जन्म आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के निदुबरोलु गाँव में हुआ था। इन्होने अपने गांव के स्कूल में एडमिशन लिया जिसके बाद आंध्र-क्रिश्चियन कॉलेज से स्नातक किया। साल 1926 में इंग्लैंड चले गए और वहां के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में बी.लिट किया। जिसके बाद ये भारत वापस आ गए। उन्होंने मद्रास (चेन्नई) के पचैयप्पा कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में पढ़ाया।

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N. G. Ranga का राजनीतिक करियर

रंगा 1930 में गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए। उन्होंने 1933 में ‘दंगा आंदोलन’ का नेतृत्व किया। जिसके तीन साल बाद उन्होंने किसान कांग्रेस पार्टी शुरू की। रंगा इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर्स ( International Federation of Agricultural Producers) के संस्थापकों में से एक थे। उन्होंने साल 1946 में खाद्य और कृषि संगठन,साल 1948 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन और साल 1952 में राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन का नेतृत्व किया।

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उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और राजाजी के साथ भारत कृषक लोक पार्टी और स्वातंत्र्य पार्टी की स्थापना की। रंगा स्वातंत्र पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष बने और एक दशक तक इस पद पर रहे। साल 1962 में हुए आम चुनावों में, पार्टी ने 25 सीटें जीतीं और एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरे। ये साल 1972 में को फिर से कांग्रेस में शामिल हुए।

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N. G. Ranga सम्मान

  • हैदराबाद में आंध्र प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालय को उनके सम्मान आचार्य एन जी रंगा कृषि विश्वविद्यालय के रूप में नामित किया गया।
  • उनके नाम को पचास वर्षों की सेवा के साथ गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में एक सांसद के रूप में जगह मिली।
  • एन.जी. 2001 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विविध कृषि के लिए रंगा किसान पुरस्कार की स्थापना की गई थी।
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सफर का अंत

इन्होने ने 1930 से 1991 तक छह दशकों तक भारतीय संसद की सेवा की। उनकी मृत्यु 9 जून 1995 को हुई। प्रधान मंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने प्रो रंगा के निधन पर शोक व्यक्त किया, प्रधान मंत्री ने कहा कि प्रो रंगा के निधन में, देश ने एक उत्कृष्ट सांसद और सार्वजनिक कारणों और ग्रामीण किसानों का एक चैंपियन खो दिया है। इनके देहांत के बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने 3 दिन का राजकीय शोक घोषित किया था।

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6 November, 2019

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