‘Happy Birthday Choudhry Rahmat Ali’: जिन्होंने किया था “पाकिस्तान” का नामकरण!
शख्सियत

‘Happy Birthday Choudhry Rahmat Ali’: जिन्होंने किया था “पाकिस्तान” का नामकरण!

चौधरी रहमत अली (Choudhry Rahmat Ali) पाकिस्तान के एक राष्ट्रवादी थे। जिन्होंने पाकिस्तान राज्य के निर्माण में अपना योगदान दिया। चौधरी रहमत अली (Choudhry Rahmat Ali) को पाकिस्तान आंदोलन के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है। चौधरी रहमत अली का जन्म 16 नवंबर 1897 को पंजाब ब्रिटिश भारत के होशियारपुर जिले के बालाचूर शहर में एक गुर्जर मुस्लिम परिवार में हुआ था। साल 1918 में इस्लामिया कॉलेज लाहौर (Islamia College Lahore)से स्नातक करने के बाद उन्होंने कानून का अध्ययन करने के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया।

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उन्होंने 1933 में बीए की डिग्री और 1940 में एमए की डिग्री कैंब्रिज विश्वविद्यालय (University of Cambridge) से प्राप्त की। 1933 में, उन्होंने पहली बार एक पम्फलेट प्रकाशित किया “Now Or Never”. जिसमे पहली बार पाकिस्तान शब्द का इस्तेमाल हुआ था। साल 1946 में उन्होंने इंग्लैंड में पाकिस्तान राष्ट्रीय आंदोलन की स्थापना की। जिसके बाद साल 1947 तक उन्होंने दक्षिण एशिया के लिए अपने दृष्टिकोण के बारे में विभिन्न पुस्तिकाओं का प्रकाशन जारी रखा।

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पाकिस्तान की अवधारणा

साल 1932 में अली 3 हंबरस्टोन रोड के कैम्ब्रिज में एक घर में चले गए। जहां उन्होंने पहली बार ‘पाकस्तान’ शब्द लिखा था। पाकिस्तान के नाम के निर्माण के कई खाते भी हैं। एक मित्र अब्दुल करीम जब्बार के अनुसार नाम तब सामने आया जब अली साल 1932 में अपने दोस्तों पीर अहसन-उद-दिन और ख्वाजा अब्दुल रहीम के साथ थेम्स के किनारे घूम रहा था।

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सर मोहम्मद इकबाल ने कहा कि 1930 में फर्स्ट राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस के लिए रहमत अली लंदन गए थे और उनसे पूछा था कि वह इलाहाबाद में प्रस्तावित मुस्लिम राज्य की सरकार को क्या कहेंगे। इकबाल ने उनसे कहा कि वे इसे प्रांतों के नामों के आधार पर “पाकिस्तान” कहेंगे।

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28 जनवरी 1933 को अली साहब ने एक पेम्पलेट जारी किया जिसका नाम था “Now or Never; Are We to Live or Perish Forever?” पाकिस्तान शब्द इंडिया की पांच Northern units को मिलाकर बनाया गया है. और वो यूनिट्स हैं Punjab, North-West Frontier Province (Afghan Province), Kashmir, Sind and Baluchistan.

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पाकिस्तान बनने के बाद

साल 1947 में पाकिस्तान के विभाजन और निर्माण के बाद अली 6 अप्रैल 1948 को लाहौर पाकिस्तान लौट आए। वे लाहौर में अपने आगमन के बाद से ही पाकिस्तान के निर्माण को लेकर अपने असंतोष की आवाज उठा रहे थे। अली ने देश में रहने की योजना बनाई थी, लेकिन पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। उनका सामान जब्त कर लिया गया और अक्टूबर 1948 में वे इंग्लैंड के लिए खाली हाथ चले गए।

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सफर का अंत

अली का निधन 3 फरवरी 1951 को कैंब्रिज में हुआ था। थेल्मा फ्रॉस्ट के अनुसार, मृत्यु के समय वह ” निराश और अकेला” था। इमैनुअल कॉलेज कैम्ब्रिज के मास्टर एडवर्ड वेलबर्न (Emmanuel College, Cambridge, Edward Welbourne) ने निर्देश दिया कि कॉलेज अंतिम संस्कार के खर्चों को कवर करेगा। उन्हें 20 फरवरी को इंग्लैंड के कैंब्रिज में कैम्ब्रिज सिटी कब्रिस्तान में दफनाया गया था।

15 November, 2019

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