जज के रुप में काम करने वाले कांग्रेस पार्टी के इस अध्यक्ष ने हिंदू धर्म में धर्मांतरण को बताया था उचित
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जज के रुप में काम करने वाले कांग्रेस पार्टी के इस अध्यक्ष ने हिंदू धर्म में धर्मांतरण को बताया था उचित

शख्सियत डेस्क: देश की सबसे पुरानी पार्टियों में शुमार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) के इतिहास में कई पार्टी अध्यक्षों (Congress Presidents) ने काम किया । कुछ ने पार्टी के हित में काम किया तो कुछ ने पार्टी के हित में काम करते-करते पार्टी को दुनिया की नजरों में लाया, पार्टी को नई बुलंदियों पर पहुंचाया।

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इनमें से कुछ पार्टी अध्यक्षों (Congress Presidents) को तो पूरी दुनिया जानती है लेकिन कुछ अध्यक्ष ऐसे भी हुए जिन्हें शायद ही कोई याद करता है। इसी कड़ी में आज हम आपको एक ऐसे भूतपूर्व कांग्रेस अध्यक्ष (Former Congress President) के बारे में बताने जा रहे है, जिन्हें शायद आप भी नहीं जानते होंगे।

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नायर का जीवन परिचय: एक झलक

जी हां मनकारा (Mankara) के पालाक्कड (Palakkad) जिले में आज के दिन ही जन्म लेने वाले (11 जुलाई 1857) इस शख्स का नाम सर सी.शंकरन नायर ( C.Sankaran Nair) था। बता दें कि सन् 1880 में पहली बार मद्रास हाईकोर्ट (Chennnai Highcourt) में इन्होंने वकील के रुप में कार्यभार संभाला। समय के साथ साथ राजनीति में रुचि और प्रखर राष्ट्रवादी विचारधारा के कारण यह(C.Sankaran Nair) कांग्रेस पार्टी (Congress party) में शामिल हो गए।

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उनके अंदर इस बहुगुणी प्रतिभा को देखकर सन् 1887 में इन्हें कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष (Congress President) नियुक्त किया गया। नायर ने सन् 1897 में अमरावती (Amrawati) में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian Natioanl Congress) अधिवेशन की अध्यक्षता भी की थी। सन् 1908 से इन्होंने एडवोकेट जनरल (Advocate general) के रुप में काम करना शुरु किया और समय समय पर इन्होंने जज के रुप में भी काम किया।

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नायर के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण एवं सबसे साहसिक फैसला

जज के रुप में काम करते हुए इनके जीवन का का सबसे प्रसिद्ध फैसला काफी निराला था। बता दें कि नायर ने हिंदू धर्म में धर्मांतरण को उचित ठहराया एवं कहा कि ऐसे धर्मांतरित लोग जाति बहिष्कृत नहीं है। नायर इस तरह के फैसले सुनाने वाले इकलौते जज हुए और यह फैसला उनके जीवन के सबसे बड़े एवं सबसे महत्वपूर्ण फैंसलों में से एक था।

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अपने जीवन के अंतिम दिनों में इन्होंने प्रसिद्ध मैगजीन द मद्रास लॉ (The Madras Law) एवं द मद्रास लॉ जर्नल (The Madras Law gernal) की स्थापना की एवं उसका संपादन किया। अपने जीवन में यह जिस क्षेत्र में गए वहां इन्होंने ऊंचाईयों को छुआ। 24 अप्रैल 1934 को चेन्नई (chennai) में 77 वर्ष की अवस्था में इनकी आत्मा परमात्मा में विलीन हो गई।

आज उनकी 162 वीं जयंति पर उन्हें शत्-शत् नमन। उनके द्वारा किए गए काम को सदियों तक दुनिया याद करती रहेगी।

11 जुलाई, 2019

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Awnish