Amartya Kumar Sen ऑक्सफोर्ड  के पहले Economic प्रोफेसर
शख्सियत

Amartya Kumar Sen ऑक्सफोर्ड के पहले Economic प्रोफेसर

अर्थशास्त्र के बारे में हम सबने पढ़ा है, कुछ लोगो के लिए Economic को समझना आसान होता है और कुछ लोगो के लिए Economic उतनी ही मुश्किल होती है। आज हम ऐसे ही एक अर्थशास्त्री Amartya Sen के बारे में बात करेंगे।  Amartya Kumar Sen को 1998 में अर्थशास्त्र में Nobel पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 1972 के बाद से यूनाइटेड किंगडम (UK) और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में पढ़ाने का काम किया है। Sen ने अर्थशास्त्र में बहुत योगदान दिया है। इस समय में हार्वर्ड विश्वविद्यालय में थॉमस डब्ल्यू लामोंट विश्वविद्यालय (Thomas W. Lamont University) के प्रोफेसर और अर्थशास्त्र और दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर हैं।1999 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

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Amartya Kumar Sen का शुरुवाती जीवन

Amartya Kumar Sen का जन्म 3 नवंबर 1933 को बंगाल के एक बंगाली, वैद्य परिवार में हुआ था, इस समय वो जगह पश्चिम बंगाल के नाम से जानी जाती है। रवींद्रनाथ टैगोर ने उस छोटे से बच्चे का Amartya रखा। Sen के पिता दिल्ली में विकास आयुक्त और फिर पश्चिम बंगाल लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रहे थे। 1945 में Sen अपने परिवार के साथ पश्चिम बंगाल आकर रहने लगे। Sen की मां ‘अमिता सेन’ प्राचीन और मध्यकालीन भारत के मशहूर संस्कृतिकर्मी और विद्वान क्षिति मोहन सेन की बेटी थीं, जो रवींद्रनाथ टैगोर की करीबी सहयोगी थीं। उनकी शादी ये कुछ ही समय में टूट गई थी। इसके बाद उन्होंने 2 शादियां और करी थी।

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Amartya Kumar Sen का एजुकेशन

Amartya Kumar Sen ने सेन ने 1940 में ढाका के सेंट ग्रेगरी स्कूल में अपनी हाई-स्कूल शिक्षा शुरू की। वे प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता गए जहां उन्होंने बी.ए. अर्थशास्त्र में और गणित में ग्रेजुएशन की। जब Sen collage में थे तब उन्हें मुंह के कैंसर का पता चला था और उनके पास सिर्फ 15% चांस था अगले  पांच साल जीने के लिए। उन्हें कलकत्ता में जादवपुर विश्वविद्यालय(Jadavpur University) अर्थशास्त्र विभाग के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष हैं। 1960-61 के दौरान  Amartya Kumar Sen ने ट्रिनिटी कॉलेज से छुट्टी पर M.I.T. का दौरा किया।

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Amartya Kumar Sen का करियर

Sen ने 1956 में प्रोफेसर के रूप में जादवपुर विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में एक शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया। उन्होंने उस पद पर दो साल बिताए। 1957 से 1963 तक सेन ने ट्रिनिटी कॉलेज, कैंब्रिज (Trinity College, Cambridge) के फेलो के रूप में कार्य किया। 1960 और 1961 के बीच में वो USA के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी(Massachusetts Institute of Technology) में एक विजिटिंग प्रोफेसर थे। कॉर्नेल विश्वविद्यालय में भी वे 1978-1984 तक एक विजिटिंग प्रोफेसर थे।

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करियर का दूसरा पड़ाव

उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स(Delhi School of Economics) में 1963 और 1971 के बीच अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में पढ़ाया। 1977 से 1988 तक उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाया, जहां वे पहले अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे। 19 जुलाई 2012 को, Sen को नालंदा विश्वविद्यालय (NU) का पहला चांसलर घोषित किया गया।  20 फरवरी 2015 को, सेन ने दूसरे कार्यकाल के लिए अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली।


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बहुत सी सोसाइटी से जुड़ा हुआ है नाम

उन्होंने इकोनोमेट्रिक सोसाइटी (1984), इंटरनेशनल इकोनॉमिक एसोसिएशन (1986-1989), इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन (1989) और अमेरिकन इकोनॉमिक एसोसिएशन (1994) के रूप में कार्य किया है। Amartya Sen ने भारतीय दंड संहिता की समलैंगिक विरोधी धारा 377 के खिलाफ अभियान में भी अपनी आवाज़ उठाई थी। Sen ने यूके स्थित अंतर्राष्ट्रीय विकास दान ऑक्सफैम के मानद अध्यक्ष(Honorary President) के रूप में कार्य किया है, और अब इसके मानद(Honorary) सलाहकार हैं। अगस्त 2019 में जम्मू और कश्मीर पर हुए हमले के बाद दो सप्ताह से अधिक समय तक कश्मीर में अव्यवस्था और कर्फ्यू के दौरान, Sen ने मोदी सरकार की आलोचना भी की थी।

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2 November, 2019

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Rachna