चुनाव लड़ने के लिए नहीं हैं पैसे, इसलिए इस उम्मीदवार ने EC से मांगी किडनी बेचने की इजाजत

  • चुनाव लड़ने के लिए किडनी बेचने को तैयार है ये उम्मीदवार
  • निर्दलीय उम्मीदवार ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र
  • मेरे पास चुनाव का खर्च उठाने के लिए पैसे नहीं है

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 अपने आप में इतिहास रचने जा रहा है। इस चुनाव में वो सब हो रहा है, जो पहले कभी नहीं हुआ। हर कोई इस बार अपनी दावेदारी को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है। लेकिन दावे में कितनी हकीकत है ये 23 मई को चुनाव नतीजों के साथ साफ हो जाएगा।

खैर पहले चरण के मतदान के बाद अब देश दूसरे चरण के चुनाव के लिए तैयारी कर रहा है। लेकिन इन तैयारियों के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। एक उम्मीदवार ऐसा है जो चुनाव तो लड़ना चाहता है, लेकिन चुनाव के लिए जो खर्च चाहिए उसको देने में असमर्थ है। जिसे लेकर उसने चुनाव आयोग से गुहार लगाई है।

चुनाव लड़ने के लिए किडनी बेचने को तैयार है ये उम्मीदवार

क्या आपने कभी सुना है चुनाव लड़ने के लिए पैसे जुटाने के लिए कोई अपनी किडनी तक बेचने के लिए तैयार हो गया हो। सुनने में अजीब जरूर लगेगा। लेकिन ये सच है। हैरान कर देने वाली यह खबर मध्यप्रदेश के बालाघाट लोकसभा सीट की है। जहां निर्दलीय उम्मीदवार पूर्व विधायक किशोर समरीते ने चुनावी खर्च निकालने के लिए चुनाव आयोग से अपनी किडनी बेचने की अनुमित मांगी है।

क्यों किडनी बेचने को मजबूर है ये उम्मीदवार ?

  • किशोर ने किडनी बेचने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी को खत लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि लोकसभा चुनाव में किसी भी प्रत्याशी की व्यय सीमा 75 लाख रुपये है, लेकिन चुनाव लड़ने के लिए इतने पैसे मेरे पास नहीं है।
  • दूसरे उम्मीदवारों के पास हजारों करोड़ की संपत्ति है। चुनाव को महज 15 दिन ही बचे हैं ऐसे में इतने कम समय में पैसे जुटाना मुश्किल है।
  • किशोर समरीते ने चुनाव आयोग से यह भी अनुरोध किया है कि आयोग उन्हें 75 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराए या फिर बैंक से
  • कर्ज दिलवा दे। यदि ऐसा नहीं हो सकता है तो उन्हें एक किडनी बेचने की अनुमति दें। ताकि वो चुनाव लड़ सकें।

आपको बता दें, किशोर समरीते 10 साल बाद चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि चुनाव प्रक्रिया हर चुनाव में महंगी होती जा रही है। कमजोर वर्ग के व्यक्ति के लिए तो चुनाव लड़ना मुश्किल है। इसलिए चुनाव आयोग को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे आम आदमी के लिए चुनाव लड़ना आसान हो।