देश के सबसे बड़े दानवीर बने अजीम प्रेमजी, परोपकार कार्य के लिए दान किए 52,750 करोड़ रुपए

नई दिल्ली। भारत की दिग्गज आई कंपनी विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी देश के सबसे बड़े दानवीर बन गए हैं। प्रेमजी ने 52,750 करोड़ रुपए परोपकार कार्य के लिए अजीम प्रेमजी फाउंडेशन में दान किए हैं। यह पैसा गरीब बच्चों की शिक्षा से लेकर कई दूसरे कार्यों में खर्च किया जाएगा।

दरअसल, प्रेमजी ने विप्रो लिमिटेड के 34 फीसदी शेयर यानी लगभग 52,750 करोड़ रुपये अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को दान में दे दिए हैं। सरल भाषा में समझें तो इन शेयरों के एवज में होने वाले लाभ को फाउंडेशन से जुड़ी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

इतनी बड़ी रकम दान मिलने के बाद विप्रो की तरफ से एक बयान में कहा गया कि अजीम प्रेमजी अपनी निजी संपत्तियों का अधिक से अधिक त्याग कर रहे हैं। यह पैसा धर्माथ कार्य के लिए दान देकर परोपकार के कार्यों में खर्च होगा। इस राशि के साथ अजीम प्रेमजी अब तक परोपकार कार्य के लिए 145,000 करोड़ रुपये (21 अरब डॉलर) दान कर चुके हैं। यह विप्रो लिमिटेड के आर्थिक स्वामित्व का 67 फीसदी है।

बिल गेट्स, जॉर्ज सोरोस और वॉरेन बफेट जैसे दुनिया के उन नामचीन लोगों की कतार में अजीम प्रेमजी भी शामिल हैं, जिन्होंने समाज कल्याण के कार्यों के लिए बड़ी रकम दान की है। बता दें कि फोर्ब्‍स पत्रिका के मुताबिक अजीम प्रेमजी की संपत्ति 21.8 बिलियन डॉलर है और वह एशिया के टॉप अमीरों में शुमार हैं।

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन मुख्य रूप से शिक्षा के क्षेत्र में काम करता है।  पब्लिक स्कूलिंग सिस्टम को बेहतर बनाने के साथ अजीम प्रेमजी फाउंडेशन इस क्षेत्र में काम करने वाली कई एनजीओ को आर्थिक मदद भी देता है। अजीज प्रेमजी फाउंडेशन कर्नाटक, उत्तराखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पुडुचेरी, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और उत्तर-पूर्वी राज्यों में कार्य कर रही है।

ठुकराया था पाकिस्तान जाने का ऑफर

यहां ये भी बताना जरूरी है कि अजीम प्रेमजी उस परिवार से आते हैं, जिसने बंटवारे के दौर में पाकिस्‍तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्‍ना के ऑफर को ठुकरा दिया था। जिन्‍ना ने अजीम प्रेमजी के पिता मोहम्‍मद हाशिम प्रेमजी को पाकिस्तान का विदेश मंत्री बनाने का ऑफर दिया था, लेकिन उन्‍होंने इस ऑफर को ठुकरा कर भारत में रहना पसंद किया था। अजीम प्रेमजी के पिता हाशिम प्रेमजी उस समय चावल और कुकिंग ऑयल के मशहूर कारोबारी हुआ करते थे। हाशिम प्रेमजी को राइस किंग ऑफ बर्मा कहा जाता था।