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प्रमोशन के लिए दिल्ली पहुंचे फिल्म ‘फिर उसी मोड़ पर’ के कलाकार, तीन तलाक पर बनी है फिल्म

नई दिल्ली: 8 मार्च यानी महिला दिवस के दिन देश भर में एक ऐसी फिल्म रिलीज होने जा रही है, जो मुस्लिम महिलाओं के हक में बनी है। जी हां हम बात कर रहे हैं फिल्म ‘फिर उसी मोड़ पर’ की। ये फिल्म महान निर्देशक स्वर्गीय लेख टंडन द्वारा लिखी गई है। फिल्म में मुख्य भूमिका में कनिका बाजपेई, नादिरा बब्बर, कंवलजीत सिंह, परमीत सेठी आदि नजर आयेंगे। फिल्म रिलीज होने से पहले कलाकार प्रमोशन में भी जुटे हैं। इसी कड़ी में आज (28 फरवरी) को इस फिल्म के कलाकार दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

अभिनेता कंवलजीत सिंह से जब फिल्म में काम करने का एक्सपीरियंस पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये फिल्म बहुत ही गंभीर विषय पर है। मैं खुद को भाग्यशाली महसूस करता हूं कि मुझे इस फिल्म में काम करने का ऑफर मिला।कंवलजीत सिंह ने कहा कि ये फिल्म बहुत ही खूबसूरत है। इस दौरान वहां अभिनेत्री शिखा(जो दूसरी लीड रोल में है) भी मौजूद थी। Newsup2Date ने शिखा से पूछा कि असल जिंदगी में जो तीन तलाक का सामना कर रहीं हैं उनके लिए क्या कहेंगी ?

Newsup2Date के सवाल का जवाब देते हुए शिखा ने देश की उन महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि कोई भी महिला खुद को कमजोर ना समझें। वो बहुत पावरफुल है। उन्हें अगर कोई भी रोकने की कोशिश करता है, तो उन्हें जवाब देने की हिम्मत लानी होगी। उन्हें अपनी आवाज उठानी चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। इस दौरान फिल्म कलाकार कनिका बाजपेई ने कहा कि ये फिल्म उन महिलाओं पर आधारित है, जो तीन तलाक से प्रताड़ित है। इस फिल्म का मकसद लोगों की सोच बदलना है। जो लोग महिला को खेल समझते हैं, उनके लिए ये फिल्म बनाई गई है।

वहीं इस फिल्म में मुस्लिम महिला मंच ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुस्लिम महिला आंदोलन से जुड़ी यासमीन ने भी मीडिया को संबोधित किया। यासमीन ने कहा कि ये फिल्म हमारी लड़ाई को नेशनल लेवल तक लेके जाएगी। यासमीन ने कहा कि ये फिल्म लोगों की सोच को बदलेगी। यासमीन ने फिल्म के सफल होने की शुभकामनाएं भी दी। आपको बता दें, फिल्म की कहानी मुस्लिम समाज में होने वाले तीन तलाक से जुडी हुई है। इस फिल्‍म में तीन तलाक से जुड़े उन पहलुओं को सामने रखा है, जिसकी मार सिर्फ मुस्लिम महिलाओं को झेलनी पड़ती है। साथ ही तीन तलाक के बाद उस महिला पर क्‍या बीतती है, ये भी फिल्‍म दिखाने का प्रयास किया गया है। ‘फिर उसी मोड़ पर’ पूरी तरह से क्‍लासिकल फिल्‍म है।