चंद्रयान- 2 के सफलतापूर्वक लॉन्चिंग के पीछे दो रॉकेट महिलाओं का हाथ
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चंद्रयान- 2 के सफलतापूर्वक लॉन्चिंग के पीछे दो रॉकेट महिलाओं का हाथ

नई दिल्ली: एक सप्ताह की देरी के बाद इसरो ने चंद्रयान- 2 को सफलतापूर्वक श्रीहरिकोटा से लॉन्च कर दिया है और वह चंद्रमा पर जा रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मिशन को कामयाब बनाने में पूरी इसरो की टीम जुटी रही लेकिन इस मिशन का पूरा दारोमदार दो महिलाओं के कंधों पर था।इस मिशन के कामयाबी का सारा सारा श्रेय इन दोनों महिलाओं को ही जाना चाहिए। बता दें कि इस मिशन का सारा कार्यभार दो महिला वैज्ञानिकों मुथैया वनिता और रितु करिदल(ritu karidhal) के हाथों में था। जिन्होंने अपने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया और अब भारत चंद्रमा पर जाने वाला चौथा देश बन गया है।

आइए इसरो के चंद्रयान- 2 मिशन को सफल बनाने वाली रॉकेट महिलाओं के बारे में जानते है-

मुथैया वनिता (परियोजना निदेशक – इसरो चंद्रयान- 2)

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इसरो के भीतर मुथैया वनिता का एक विशिष्ठ कैरियर रहा है। लेकिन इस मिशन की कामयाबी ने इन्हें एक नई पहचान दिलाई है। बता दें कि वनिता ने 2006 में एस्टोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया में सर्वश्रेष्ठ महिला वैज्ञानिक का पुरस्कार जीता है। जबकि इसरो के साथ काम करते हुए नवंबर 2013 में मंगलयान के प्रक्षेपण और सफलता में भी विनिता ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इस मिशन में उन्हें परियोजना निदेशक की जिम्मेदारी मिली थी, जिसे इन्होंने बखूबी निभाया। विनिता सैटेलाईट्स के लिए डेटा संचालन की जिम्मेदारी भी निभा चुकी है। वह अपने समस्या को बेहतर तरीके से सुलझाती है, जो उन्हें औरों से अलग बनाता है।

रितु करिदल (मिशन निदेशक – इसरो चंद्रयान)

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रितु करिदल को भारत की रॉकेट वुमन(Ritu Karidhal) के रूप में जाना जाता है। साल 2013-2014 में करिदल मंगलयान के लिए डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर का काम कर रही थीं। लेकिन इस मिशन में करिदल, मुथैया वनिता के साथ मिलकर काम कर रही है और मिशन डायरेक्टर का कार्यभार संभाल रहीं है। रितु करिदल ने आईआईएससी, बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल किया है। और उन्हें पूर्व में मार्स ऑर्बिटर मिशन के लिए इसरो टीम अवार्ड और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से इसरो यंग साइंटिस्ट अवार्ड भी मिल चुका है। इस मिशन के स्वायत्तता प्रणाली को डिजाइन करना इनकी जिम्मेदारी थी।

23 July, 2019

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