तीन तलाक का विरोध कर रहे लोगों को एक और झटका, दिल्ली HC ने खारिज की याचिका

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दिल्ली हाईकोर्ट ने तीन तलाक के अध्यादेश को चुनौती की याचिका खारिज की (साभार-गूगल)

नई दिल्ली: तीन तलाक को लेकर विरोध कर रहे मुस्लिम समुदाय के लोगों को एक और बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के तीन तलाक के अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।

बता दें चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका खारिज करने के बाद कोर्ट ने कहा है कि यह महज अध्यादेश है और इस पर अभी राज्यसभा विचार करेगा। राज्यसभा इसे अस्वीकार भी कर सकती है। आपको बता दें कि 19 सितंबर को केंद्र सरकार मुस्लिम वीमन (प्रोटेक्शन ऑफ राईट्स ऑन मैरिज) अध्यादेश 2018 लेकर आई थी। लोकसभा ने पिछले साल इस संबंधी कानून पारित किया था। उस कानून में कुछ संशोधन के साथ केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाया था।

इसी अध्यादेश के खिलाफ याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि अध्यादेश संविधान की धारा 14,15, 21 और 123 का उल्लंघन करती है। अध्यादेश के तहत धारा 4 में ट्रिपल तलाक पर अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है। धारा 7 के तहत इसे गैर जमानती अपराध करार दिया गया है। ये याचिका शाहिद आजाद नामक शख्‍स ने लगाई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि तीन तलाक को लेकर मोदी सरकार द्वारा लाया गया अध्यादेश कानूनी रूप से अनावश्यक और जबरदस्ती मुस्लिम समुदाय पर थोपा गया है।

तीन तलाक अध्यादेश को लेकर याचिका में कहा गया है कि यह सीधे तौर पर कानून का दुरुपयोग है। इसके अलावा यह आर्टिकल 14, 15, 20,21 और 25 का भी सीधे तौर पर उल्लंघन है। अध्यादेश को याचिका में क्रिमिनल और सिविल लॉ स्कीम का उल्लंघन बताया गया है। इसके साथ ही कहा गया है कि ये अध्यादेश अस्पष्ट और अनिश्चित है। बता दें कि पिछले साल अगस्त में तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया था । पांच में से तीन जजों ने तीन तलाक को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करार दिया था।

जजों ने कहा था कि संविधान का अनुच्छेद 14 जब सभी को समानता का अधिकार देता है तो तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं के मूलभूत अधिकारों के हनन की इजाजत नहीं दी जा सकती। महिलाओं को यह प्रथा बिना कोई मौका दिए शादी को खत्म कर देती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार तीन तलाक पर अध्यादेश लेकर थी।