अमृतसर में किसानों ने जलाए ठूंठ, बडा प्रदूषण का स्तर
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अमृतसर में किसानों ने जलाए ठूंठ, बडा प्रदूषण का स्तर

भारत की राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता दुनिया के किसी भी बड़े सर्वेक्षण में सबसे खराब है। 1600 विश्व शहरों के डब्ल्यूएचओ सर्वेक्षण के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण का अनुमान है कि हर साल 1.5 मिलियन लोग मारे जाते हैं, यह भारत का पांचवा सबसे बड़ा हत्यारा है। वहीं अमृतसर में किसानों ने ठूंठ जलाए, जिस पर उनका कहना है, ‘सरकार ने अभी तक हमारी समस्या को हल करने के लिए कदम नहीं उठाए हैं। हम इसे जलाना नहीं चाहते हैं, हम समझते हैं कि यह प्रदूषण पैदा करता है लेकिन हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।’

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दिवाली में ज्यादा ख़राब मौसम

WHO के अनुसार, भारत में पुरानी सांस की बीमारियों और अस्थमा से होने वाली मृत्यु दर सबसे अधिक है। दिल्ली में खराब गुणवत्ता वाली हवा (Delhi Air Quality) अपरिवर्तनीय रूप से सभी बच्चों के 2.2 मिलियन या 50 प्रतिशत फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है।

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स्टबल बर्निंग दिवाली के दौरान पटाखे जलाने और ठंड के मौसम सहित कई कारकों के कारण इस तीन महीनो में मौसम ज्यादा खराब हो जाता है।

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बच्चों और बड़ों पर हो रहा है हानिकारक असर

दिल्ली में 2.2 मिलियन बच्चों की हवा की गुणवत्ता खराब होने के कारण अपरिवर्तनीय फेफड़ों की क्षति होती है, इसके अलावा बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली को  भी कम करता है। बच्चों को इसके अलावा कैंसर, मिर्गी, मधुमेह और यहां तक कि कई स्केलेरोसिस जैसे रोग हो जाते है। इसके अलावा बड़े लोगो को खराब वायु की वजह से फेफड़ों की क्षमता कम होने, सिरदर्द, गले में खराश, खांसी, थकान, फेफड़ों के कैंसर और प्रारंभिक मृत्यु का कारण है।

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धुएं के प्राथमिक स्रोत स्टब बर्निंग, कूड़ा कचरा, सड़क की धूल, बिजली संयंत्र, कारखाने और वाहन हैं। 2017 में प्रदूषित हवा की मात्रा का सामना करने के लिए भारत की केंद्र सरकार द्वारा राजधानी में एक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया था। इस  दिन स्कूलों, कार्यालयों और अन्य सरकारी केंद्रों के लिए छुट्टी के रूप में घोषित की गई थी।

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12 October, 2019

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Ashish Jain