अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस: आपको गंभीर रोगों का शिकार बना रहा है गुस्सा, ऐसे बनें सहनशील

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ग्राफिक साभार: गूगल

नई दिल्ली। आज अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस है। हर साल 15 नवंबर के दिन पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस मनाया जाता है। दरअसल, बदलते लाइफस्टाइल और सामाजिक माहौल की वजह से लोगों के अंदर सहनशीलता लगातार घटती जा रही है। सामाजिक माहौल ना बिगड़े और लोग एक दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहे, इसी संकल्प के साथ अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस मनाया जाता है।

गुस्सा विनाश की पहली सीढ़ी कहा जाता है (साभार: गूगल)

कैसे हुई शुरुआत

1995 में महात्मा गांधी की 125वीं जयंती पर संयुक्त राष्ट्र ने सहनशीलता वर्ष मनाया था। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1996 में औपचारिक तौर पर प्रस्ताव पास कर अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस की शुरुआत की थी। प्रस्ताव के मुताबिक हर साल 15 नवंबर को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस मनाया जाएगा।

इस साल संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस पर ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने की कोशिश की है। दरअसल, इस साल संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस पर यू-ट्यूब क्रिएटर्स के साथ मिलकर एक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस कार्यक्रम में प्रेरणादायक शॉर्ट फिल्मों और यू-ट्यूब के प्रेरणादायक क्रिएटरों की वीडियो दिखाई जाएंगी।

एक प्रदर्शन के दौरान चिल्लाती युवती (साभार: गूगल)

युवाओं में तेजी से बढ़ रही समस्या

छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई-झगड़ा आम हो गया है। इतना ही नहीं लोग रिश्ते-नाते भूलकर भी जान लेने और देने पर उतारू हो रहे हैं। खासकर युवा पीढ़ी में जल्द उत्तेजित हो जाने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ‘गर्म खून’ और ‘लड़कपन’ कहकर  कई बार परिवार वाले भी बच्चों की बातों को टाल देते हैं। लेकिन यही गलती आगे जाकर गुस्से में बदल जाती है। जल्द उत्तेजित होने वाले लोग खुद के साथ-साथ दूसरे को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

शास्त्रों में भी कहा गया है कि चिंता ‘चिता’ समान और क्रोध ‘विनाश’ की पहली सीढ़ी होता है। जल्दी उत्तेजित होने वाले जहां अन्य लोगों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं, खुद की सेहत से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग उन्हें जकड़ रहे।

सेहत पर पड़ रहा असर

अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े वरिष्ठ डॉ. एमसी शर्मा कहते हैं कि आजकल बिगड़ते खानपान और अनियमित दिनचर्या से लोगों में तनाव बढ़ रहा है। ऐसे में उनके अंदर सहनशीलता घट रही है और इसी वजह से वे रक्तचाप, हृदयरोग, डायबटीज जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में भी आ रहे हैं। बढ़ते मरीज और घटनाएं इसके प्रमाण हैं। अधिकांश घटनाओं के लिए नशा भी जिम्मेदार है।

क्या है गुस्से की वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक, सही शिक्षा के अभाव में नई पीढ़ी में मानसिक सहनशीलता कम हो रही है। वहीं सामाजिक परिवेश के आंकलन के बिना बनाए गए कानून भी आग में घी का काम कर रहे हैं। पढ़ाई व संस्कारों के लिए स्कूलों में डांटना-मारना उत्पीड़न कहा जा रहा है। ऐसे में जहां शिक्षकों को अपमान झेलना पड़ता है। वहीं, युवाओं के हौसले बुलंद हैं। अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस पर हमें कोशिश करनी चाहिए कि बच्चों पर इस तरह का तनाव न डाला जाए।

कैसे हो समस्या का निदान

इस समस्या से बचने के लिए सिर्फ शरीर ही नहीं बल्कि दिमाग को भी मजबूत करना पड़ेगा। इस अंतरराष्ट्रीय सहनशीलता दिवस पर हर माता-पिता को संकल्प लेना चाहिए कि वो अपने बच्चों को सहनशील बनाएंगे। अगर आप अपने बच्चों को इस समस्या से बचाना चाहते हैं तो सबसे पहले खुद का मानसिक तनाव कम करें। उनसे प्यार से बात करें और उन्हें अच्छे बुरे का ज्ञान दें। उन्हें बचपन से ही दया व सहिष्णुता का पाठ पढ़ाएं।

बच्चों को समझाने के लिए आप किसी महिला का उदाहरण उन्हें दे सकते हैं, जिनका बच्चों से खास लगाव हो। उन्हें समझाएं कैसे एक महिला त्याग, सेवा, दयाभाव व परिवार के प्रति समर्पित रहती हैं और बुरी से बुरी स्थिति में भी सहिष्णुता बनाए रखती हैं।