पेट की हर बीमारी का अचूक नुस्खा है जायफल, अधिक सेवन हो सकता है खतरनाक

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साभार: गूगल

नई दिल्ली। आयुर्वेद अपने अंदर ऐसे कई रहस्य समेटे हुए, जिनका मानव जीवन पर गहरा प्रभाव है। छोटे से छोटे पौधे से लेकर बड़े-बड़े पेड़ों का आयुर्वेद में वर्णन किया गया है। आयुर्वेद में एक ऐसी ही अचूक औषधि का वर्णन है, जो पेट में गैस या पाचन संबंधी दिक्कतों को दूर करने में मदद करता है।

हम यहां बात कर रहे हैं जायफल की, जिसका वर्णन आयुर्वेद में पाचन संबंधी बीमारियों को ठीक करने के लिए किया गया है। दरअसल, जायफल एंटी बैक्टीरियल और एंटी ऑक्सिडेंट से भरपूर होता है। इसके इन्हीं गुणों से शरीर को रोक प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। इसके अलावा खांसी-जुकाम जैसी मौसमी बीमारियों का जायफल पुराना और आजमाया हुआ नुस्खा है। हालांकि, जायफल का अधिक सेवन सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार, यदि आपको पेट फूलने, गैस बनने या फिर किसी और तरह की पाचन संबंधी बीमारी है, तो 2 चम्मच जायफल में एक चौथाई चम्मच अदरक पाउडर मिला लें। खाना खाने से थोड़ी देर पहले इस मिश्रण का 1/8 चम्मच सेवन गुनगुने पानी के साथ करें।

इसके अलावा पाचन तंत्र को सुधारने के लिए 3-4 छोटी इलायची, एक चुटकी जायफल और सौंठ पाउडर डालकर इसकी चाय पीने से भी लाभ मिलता है। दस्त के इलाज में दो बड़े चम्मच चीनी, आधा चम्मच इलायची, एक चम्मच खसखस और जायफल मिला कर इसका सेवन हर 2 घंटे में करना चाहिए। मितली और अपच की स्थिति में एक चम्मच शहद के साथ 3-4 बूंदें जायफल का तेल मिला कर सेवन करने से आराम मिलता है।

खांसी-जुकाम जैसी मौसमी बीमारियों का जायफल पुराना घरेलू नुस्खा है। गर्म पानी में ¼ चम्मच जायफल मिला कर पीने या चाय में मिलाकर पीने से भी सर्दी-खांसी जैसी बीमारियों से राहत मिलती है।

हालांकि, जायफल का अधिक इस्तेमाल भी खतरनाक हो सकता है। आयुर्वेद के जानकारों का कहना है कि जायफल का सेवन रोज 3-5 ग्राम से ज्यादा नहीं करना चाहिए। इससे ज्यादा जायफल का इस्तेमाल आपकी एकाग्रत और स्फूर्ति पर असर डाल सकता है। जायफल के अधिक सेवन से पेट दर्द, घबराहट, एलर्जी, दमा और कोमा जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।