नोबेल विजेता रुडयार्ड किपलिंग ने लिखी थी ‘जंगल बुक’, हर बच्चे को पसंद है मोगली-बघीरा की कहानी

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साभार-गूगल

नई दिल्ली। जंगल बुक की कहानी और इसके हीरो मोगली को शायद ही कोई बच्चा न जानता हो। इस अद्भुत कहानी के रचयिता हैं मशहूर साहित्यकार रुडयार्ड किपलिंग, जिनका आज जन्मदिन है। एक पत्रकार, कहानीकार, कवि और साहित्यकार रुडयार्ड किपलिंग का जन्म भारत में हुआ था।

रुडयार्ड नाम के पीछे छिपी है कहानी

30 दिसंबर, 1865 को ब्रिटिश भारत की बाम्बे प्रेसिडेंसी में रुडयार्ड किपलिंग का जन्म हुआ था। उनके माता-पिता उस वक्त भारत में ही रहते थे। रुडयार्ड नाम रखे जाने के पीछे भी थोड़ी अलग कहानी है। कहते हैं कि उनके माता-पिता ने रुडयार्ड झील के पास शादी की थी। अपने पहले बच्चे का नाम उन्होंने रुडयार्ड झील के नाम पर रखा।

आत्मकथा में लिखे बचपन के दर्द

रुडयार्ड किपलिंग ने अपनी आत्मकथा में अपने जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख भी किया है। उस वक्त ब्रिटिश भारत में काम कर रहे अंग्रेज अफसर दम्पत्ति के बच्चों को सही देखरेख के लिए इंग्लैंड भेज दिया जाता था। रुडयार्ड किपलिंग जब 5 साल के थे तो वह अपनी 3 साल की बहन के साथ इंग्लैंड भेज दिए गए। रुडयार्ड किपलिंग और उनकी बहन को एक ब्रिटिश दम्पत्ति के हाथों सौंप दिया गया।

भयावह थे इंग्लैंड में बिताए वो दिन

रुडयार्ड किपलिंग ने अपनी आत्मकथा में इस दौर को सबसे भयावह बताया। किपलिंग ने लिखा, हमें पालने वाली महिला मार-पिटाई के साथ हमें डराती-धमकाती थी। हमें कई बार खाना नहीं दिया जाता था, स्कूल नहीं भेजा गया और मानसिक तौर पर यातनाएं दी जाती थी। 1877 में रुडयार्ड की मां वापस इंग्लैंड वापस लौट आई और उन्होंने अपने दोनों बच्चों की कस्टडी वापस ले ली। इसके बाद रुडयार्ड और उनकी बहन ने शिक्षा हासिल की।

भारत लौटकर शुरू की पत्रकारिता

रुडयार्ड किपलिंग 17 साल की उम्र में अपनी शिक्षा हासिल करके वापस भारत लौट आए। यहां रुडयार्ड किपलिंग ने लघु कथाएं और कविताएं लिखना शुरू की। 1886 और 1888 में रुडयार्ड किपलिंग ने क्रमश: अपनी कविता और लघु कथाओं का संग्रह प्रकाशित किया। 1889 में रुडयार्ड किपलिंग जब वापस इंग्लैंड लौटे, तो उस वक्त तक वह स्थापित लेखक बन चुके थे। इंग्लैंड लौटने के बाद रुडयार्ड किपलिंग ने शादी कर ली।

बेटी के लिए लिखी थी जंगल बुक की कहानी

कहते हैं कि रुडयार्ड किपलिंग ने 1893-94 के बीच जंगल बुक की कहानियां लिखी। यह कहानी उन्होंने अपनी बेटी जोसेफिन के लिए लिखी थी। जंगल बुक में समाहित कहानियों के किरदार से लेकर स्थान तक मध्य प्रदेश के जंगलों पर आधारित थे। जंगल बुक का जब प्रकाशन हुआ तो उस वक्त इस पुस्तक ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।

बच्चों के लिए लिखे कई मशहूर कथा संग्रह

बच्चों से लेकर बड़ों तक को जंगल बुक की कहानी खूब पसंद आई। रुडयार्ड किपलिंग ने बच्चों के लिए द जंगल बुक के अलावा भी कुछ अन्य लघु कथाएं लिखी। 1899 में रुडयार्ड किपलिंग जब अमेरिकी दौरे पर थे, उसी वक्त उनकी बेटी जोसेफिन का निमोनिया की वजह से निधन हो गया। अपनी बेटी के लिए लिखी उनकी कहानियों का संग्रह ‘जस्ट सो स्टोरी’ के नाम से प्रकाशित हुआ। इसके अलावा ‘मोगली ब्रदर्स’, ‘द एलिफेंट चाइल्ड’, ‘द सेकेंड जंगल बुक’  और ‘रिकी-टिकी टावी’ जैसी लघु कथाएं लिखी।

उपन्यास ‘किम’ ने पूरी दुनिया में दिलाई शोहरत

1901 में रुडयार्ड किपलिंग की कलम से रचे गए उपन्यास ‘किम’ को उनकी सबसे अच्छी साहित्यिक कृति माना जाता है। इस उपन्यास में एक अनाथ आयरिश बच्चे किम की कहानी है, जो लाहौर में रहता है। रुडयार्ड किपलिंग के इस  उपन्यास में अनाथ बच्चा एक लामा के साथ यात्रा पर निकलता है और आखिर में एक खुफिया विभाग का अफसर बनता है।

किम ने दिलाया नोबेल पुरस्कार

रुडयार्ड किपलिंग को उनके इस अद्भुत उपन्यास के लिए 1907 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भी रुडयार्ड किपलिंग की पुस्तक किम को अपनी सबसे पसंदीदा पुस्तक माना था।

लेखन का जादू बच्चों से लेकर बड़ों पर भी चला

किपलिंग की लेखन शैली अद्भुत थी। उनकी कहानियों में भारतीय भाषाओं के साथ, अंग्रेजी, बाइबल से जुड़ी बातें और सरल लेखन शैली का प्रयोग होता था। रुडयार्ड किपलिंग के लेखन में ऐसा जादू था कि वह बच्चों से लेकर बड़ों तक को कहानी के अंत तक बांधे रखता था। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भी रुडयार्ड किपलिंग ने लेखन जारी रखा और कई अन्य साहित्यों की रचना की। विश्व युद्ध के दौरान रुडयार्ड किपलिंग के इकलौते बेटे जॉन की भी मौत हो गई।

किंग जार्ज की मौत से 2 दिन पहले हुआ निधन

1930 के दशक तक रुडयार्ड किपलिंग ने अपनी लेखनी बरकरार रखी, लेकिन उनकी रफ्तार कम पड़ चुकी थी। बुढ़ापे की वजह से वह अस्वस्थ्य रहने लगे। किंग जॉर्ज पंचम की मृत्यु से ठीक दो दिन पहले 18 जनवरी 1936 को रुडयार्ड किपलिंग का निधन हो गया।

दफनाए नहीं गए रुडयार्ड

रुडयार्ड किपलिंग का भारत से जुड़ाव होने के कारण उनका दाह संस्कार किया गया। उनकी अस्थियां वेस्टमिंस्टर एब्बे के पोएट्स कॉर्नर में दफनाई गई। यह वही जगह है जहां, ब्रिटेन की कई जानी-मानी हस्तियों और लेखकों को दफनाया गया या फिर उनका स्मारक बनाया गया।