किसानों के लिए दोहरी खुशखबरी: केसीसी लोन सीमा बढ़ाने की तैयारी और जैविक खेती पर भारी सब्सिडी
देशभर के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रही हैं। जहाँ एक तरफ केंद्र सरकार किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत ऋण सीमा की समीक्षा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान सरकार ने पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने के लिए खजाना खोल दिया है। इन फैसलों का सीधा असर किसानों की जेब और उनकी खेती की लागत पर पड़ने वाला है।
केसीसी लिमिट में बदलाव की सुगबुगाहट
केंद्र सरकार किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर मिलने वाले लोन की सीमा को बढ़ाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है। दरअसल, मौजूदा क्रेडिट सीमा तीन-चार साल पहले तय की गई थी और बढ़ती महंगाई व खेती की लागत को देखते हुए इसे नाकाफी माना जा रहा है। वित्त मंत्रालय के अधीन वित्तीय सेवा विभाग और कृषि मंत्रालय मिलकर इस बदलाव का खाका तैयार कर रहे हैं।
सीआईआई फाइनेंसिंग 3.0 समिट में इस बात के संकेत देते हुए वित्तीय सेवा विभाग के अतिरिक्त सचिव एमपी तंगीराला ने स्पष्ट किया कि सरकार को लगता है कि पुरानी सीमा को अब अपडेट करने की सख्त जरूरत है। यह कदम किसानों को बुवाई के समय अधिक नकदी उपलब्ध कराने में मददगार साबित होगा।
ब्याज दर और आरबीआई के ताजा निर्देश
वर्तमान में केसीसी योजना के तहत अधिकतम क्रेडिट सीमा 3 लाख रुपये है और इस योजना में करीब 9.81 लाख करोड़ रुपये का बकाया है। किसानों को राहत देने के लिए सरकार ब्याज में 2% की छूट (सबवेंशन) देती है और अगर किसान समय पर कर्ज चुका देते हैं, तो उन्हें 3% की अतिरिक्त छूट मिलती है। इस प्रकार, समय पर भुगतान करने वाले किसानों के लिए प्रभावी ब्याज दर केवल 4% प्रति वर्ष रह जाती है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में संशोधित ब्याज सबवेंशन योजना (MISS) की अवधि बढ़ा दी है। इसके तहत मौजूदा वित्तीय वर्ष में शॉर्ट-टर्म लोन लेने वाले योग्य किसानों को रियायती दरों का लाभ मिलता रहेगा। हालांकि, इस लाभ को उठाने के लिए किसानों के खाते का आधार से लिंक होना अनिवार्य बना रहेगा। ज्ञात हो कि केसीसी की शुरुआत 1998 में हुई थी और समय-समय पर इसमें सुधार किए गए हैं, जैसे 2012 में इलेक्ट्रॉनिक कार्ड जारी करने की पहल।
बटाईदार किसानों के लिए पीएम-स्वनिधि जैसी योजना पर मंथन
सिर्फ जमीन के मालिक ही नहीं, बल्कि दूसरों की जमीन पर खेती करने वाले बटाईदार या किरायेदार किसानों के लिए भी सरकार एक नई योजना लाने पर विचार कर रही है। जिस तरह रेहड़ी-पटरी वालों के लिए ‘पीएम-स्वनिधि’ योजना सफल रही है, उसी तर्ज पर बटाईदार किसानों को भी संस्थागत ऋण प्रणाली से जोड़ने की तैयारी है। एमपी तंगीराला ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि ऋण की परिभाषा का विस्तार करने की जरूरत है, क्योंकि वर्तमान में कृषि क्षेत्र के कुल क्रेडिट का एक बहुत छोटा हिस्सा ही नई पहलों में जा रहा है।
राजस्थान में बैलों से खेती करने पर 30 हजार का प्रोत्साहन
उधर, राजस्थान सरकार ने पारंपरिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक अनूठी पहल की है। राज्य सरकार उन किसानों को आर्थिक सहायता दे रही है जो खेती के लिए बैलों का उपयोग करते हैं। इस योजना के तहत किसानों को 30,000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य न केवल बैलों का संरक्षण करना है, बल्कि खेती की लागत को कम करते हुए ऑर्गेनिक फार्मिंग को प्रोत्साहित करना भी है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना को लेकर किसानों में काफी उत्साह है और अब तक 42,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। विशेष रूप से डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर जैसे जिलों से सबसे ज्यादा आवेदन आए हैं। जो किसान इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, वे ‘राज किसान साथी’ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं और विभाग द्वारा पात्र किसानों की सूची तैयार की जा रही है।
सम्मान निधि में बढ़ोतरी और भविष्य की राह
किसानों को सीधे नकद लाभ देने के मामले में भी सरकारें पीछे नहीं हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साफ किया है कि राज्य सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि’ के तहत राज्य सरकार अब किसानों को केंद्र की 6,000 रुपये की राशि के अलावा अपनी तरफ से 3,000 रुपये सालाना दे रही है। यानी, अब किसानों को कुल मिलाकर 9,000 रुपये प्रति वर्ष मिल रहे हैं।
योजना यह है कि इस राशि को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 12,000 रुपये तक ले जाया जाएगा। हाल ही में 19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम किसान योजना की 21वीं किस्त जारी की है, जिससे करोड़ों किसानों के खातों में सीधे पैसा पहुंचा है। राजस्थान के किसानों को अब तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का काम कर रही है।